Yug Purush

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8TH SEMESTER ! भाग-35 ( आकर्षण & प्रतिकर्षण )

हम तीनो फिर से टल्ली हो चुके थे. वरुण ने खाना बनने के लिए गैस पर चढ़ा दिया था ,जिसके जलने की महक भी आने लगी थी..उधर खाना जला इधर हम तीनो के दिल जले....

"उस दिन के बाद क्या हुआ...ऐश का गौतम के दोस्त के साथ कुछ लफडा था या फिर... ये सिर्फ तेरी परिकल्पना का एक हिस्सा था..."

परिकल्पना... कल्पना का नेक्स्ट लेवल.... मेरी इस हालत का कारण भी यही है और  कहानी भी यही  है
.....

"मैं बताऊ..."अरुण बीच मे बोल पड़ा जिसे रोक कर मैने कहा

"वरुण, उस दिन ऐसा कुछ भी नही था..."

"फिर ऐश गौतम के साथ क्यूँ नही गयी,..."
.
उस दिन हॉस्टल  मे आने के बाद मुझे उसका कारण  मालूम चला और कारण बताने वाला कोई और नही  बल्कि bhu था, मैं आज भी कभी-कभी सोच मे पड़ जाता हूँ कि उस साले bhu को सारी न्यूज़ मिल कैसे जाती थी और जब न्यूज़ ऐश से रिलेटेड हो तो उसकी खबर उसे और भी जल्दी मिलती थी... कभी -कभी तो ऐसा लगता की साले ने पुरे कॉलेज परिसर मे गुप्त कैमरा और माइक लगाया हुआ है. तो bhu ने मुझे बताया कि गौतम के बाप पर किसी ने जानलेवा हमला किया था और वो बहुत सीरीयस थे, इसीलिए गौतम को बीच मे ही कॉलेज से जाना पड़ा...

अब क्यूंकी गौतम और ऐश एक साथ कॉलेज आते थे इसलिए गौतम के जाने के बाद गौतम के दोस्त ने ऐश को घर ड्रॉप किया....एक तरफ जहाँ मैं ये सोच कर खुश हो रहा था कि ऐश और गौतम के बीच लड़ाई हुई होगी...  वहाँ मुझे निराशा हुई, लेकिन दूसरी तरफ गौतम के दोस्त और ऐश के बीच कुछ नही है ये जानकार मुझे खुशी भी हुई...bhu ने मुझे और भी बहुत कुछ बताया जैसे कि ऐश और गौतम के फॅमिली के बारे मे......

और जैसा कि bhu ने बताया था उसके हिसाब से गौतम के पापा और उसके अंकल गुंडे टाइप आदमी थी और पॉलिटिशियन्स से भी उनके सम्बन्ध  थे.... मतलब कि गौतम एक रहीस और बहुत पावरफुल पार्टी था, वही ऐश के पिता जी यानी मेरे ससुर  एक बिज़नेस मैन थे मतलब कि ऐश भी एक रहीस पार्टी थी....ऐश और गौतम बचपन से एक साथ पले-बढ़े, एक स्कूल मे पढ़ाई भी की लेकिन गौतम उम्र मे एक साल बढ़ा था इसलिए दोनो एक क्लास मे कभी नही आ पाए, उम्र के बढ़ते पड़ाव के साथ-साथ उन दोनो की दोस्ती प्यार मे बदलने लगी और फिर दोनो ने एक दिन एक दूसरे से प्यार का एकरार भी किया....ऐश और गौतम दोनो के घर मे दोनो के प्यार के बारे मे मालूम था और उन्हे इस रिश्ते से कोई परेशानी भी नही थी.. उन दोनों को सब आलरेडी सब कुछ सेट था....


साला, ऐसी जिंदगी भी बहुत खुशकिस्मत वालों को मिलती है, साला... जिसमे पढ़ाई करने के बाद नौकरी के चक्कर मे दर -दर  की ठोकरे ना  खानी पडे... पास हो या फेल... टॉप आओ या बॉटम ... प्लेसमेंट कम्पनिया आए, चाहे ना आए... कोई मतलब नही...  बाप का बिज़नेस है ना...  ऐसे लोगो के लिए कॉलेज सिर्फ जान पहचान वालो को दिखाने के लिए होता है की.. हम well एजुकेटेड है.. या फिर जो MBA करने का इरादा रहता है.  पर मेरे केस मे ऐसा बिलकुल भी नही था... मुझे अपने ही दम पे  पढ कर, कम्पटीशन एग्जाम क्लियर करके नौकरी लेना था...


  खैर, bhu  ने कुछ दिनो पहले ऐश के सुसाइड करने की कोशिश  का भी कारण  बताया ,उसने बताया कि गौतम किसी दूसरी लड़की के चक्कर मे पड़ने लगा  था और यही ऐश को रास नही आया तो उसने सुसाइड करने की कोशिश की...   उसके बाद गौतम ने ऐश से अपने किए की माफी भी माँगी और उन दोनो की घीसी-पीटी लव स्टोरी फिर से चालू हो गयी...जिसके लिए ऐश ने जान देने की कोशिश की थी वो उससे सच्चा प्यार तो करती थी लेकिन फिर भी दिल के किसी कोने से आवाज़ आई कि


"बेटा अरमान ,कोशिश   कर...तेरा चान्स है.... क्यूंकि गोलकीपर के रहने के बावजूद गोल होता है ना...? बस same concept..."


ये आवाज़  मेरे दिल से निकलने से पहले ही दिल मे दफ़न हो जानी चाहिए थी , मुझे उसी दिन ही ये मान लेना चाहिए था कि ऐश और मैं किसी भी लिहाज से एक -दूसरे से मेल नही खाते....  ना तो फॅमिली बॅकग्राउंड से और ना ही दिल की दुनिया से....उसकी दिल की दुनिया तो गौतम के चारो तरफ घूमती थी....  ये सब मुझे पता था.. सब पता था की मुझे ये नही करना चाहिए... लेकिन बर्बादी तो मैने खुद चुनी...  इसलिए मैने अपनी ही दिल की बात मानने से इंकार कर दिया  और इस 1500 ग्राम के दिमाग़ मे कुछ ऐसा सूझा जिससे मैं वही पुरानी घीसी-पीटी स्टोरी को अप्लाइ करने वाला था.....


"उस चुड़ैल विभा की रिक्वेस्ट आई है तेरी आइडी पर...."अरुण ने मुझसे कहा

"क्याययाया ..."

"इतना चौक क्यूँ रहा है, सिर्फ़ ये बता एसेप्ट   करूँ या नही..."अरुण ने मुझसे पुछा....

"भाव क्यूँ खाए, ज़मीन और जोरू से जुडा हुआ आदमी हूँ मै... कर ले रिक्वेस्ट  एसेप्ट ..."

अरुण ने विभा की फ्रेंड रिक्वेस्ट एसेप्ट  की और मेरे बिस्तर पर खुशी से चढ़ कर बोला....

"साली ऑनलाइन है,आजा इसका गेम बजाते है...."

मैं बैठा तो बुक खोल कर था,लेकिन ये सोचकर बुक बंद कर दी कि पहले विभा के मज़े ले लेता हूँ, पढ़ाई का क्या है वो तो कभी भी हो जाएगी, कल सुबह चार बजे उठकर पढ़ लूँगा.... लेकिन विभा डार्लिंग हर समय ऑनलाइन थोड़े ही रहने वाली है..... इसलिए किताबो को वही बिस्तर पर एक ओर फेक मै भी अरुण के पास कूदा... मेरा मतलब.. कूद कर अरुण के पास गया

"हेलो...."हम मेसेज  करते उससे पहले ही विभा ने कर दिया...

ये भी बडी अजीब कन्या है, पहले तो नफरत करती थी मुझसे.. लेकिन खूनी ग्राउंड की घटना के बाद इसका रवैया ही बदल गया मेरे प्रति... जबकी इसे तो मुझसे और नफरत करनी चाहिए उस घटना के बाद...  अब जब  लड़कियों को भगवान भी नही समझ पाया... तो  फिर हमारी क्या औकात

"हाई डियर, व्हाट आर यू डूयिंग..."अपने मोबाइल के कीबोर्ड्स को फटाफट तेज़ी से दबाते हुए अरुण ने रिप्लाइ किया...

"Nothing n you..?"

" हिला रहा हूँ, लिख कर भेजू क्या...?"अरुण मेरी तरफ देखकर पूछा "या फिर ये लिख दू की पोर्न देख रहा हूँ ."

"चूतिया है क्या, उसको लिख कि पढ़ाई कर रहा हूँ....तेरी इज्जत नही है, लेकिन मेरी तो है "

"61-62 लिख देता हूँ, साली लौंडिया है क्या समझेगी..."
"लिख दे..."

अरुण ने 61-62 लिख कर तुरंत विभा को रिप्लाइ किया , कुछ देर तक विभा का रिप्लाइ नही आया लेकिन जब उसका रिप्लाइ आया तो हम दोनो के होश उड़ गये, हम दोनो ने ये सोचा था कि विभा हमसे 61-62 का मतलब पुछेगि और हम दोनो उसे उल्लू बनाएँगे लेकिन उसका रिप्लाइ ये था...


"61-62 कम किया करो , शरीर कमजोर होता है...."

"साली बड़ी चालू है, अभी सामने मिल जाए तो इसके मुँह  मे दे दू ..."अरुण जोशियाते हुए बोला

"अब क्या रिप्लाइ करे..."मैने अरुण की तरफ देखा....

"तू रुक और देखता जा..."अरुण की उंगलिया एक बार फिर तेज़ी से मोबाइल के बटन्स पर घूमने लगी और उसने विभा को रिप्लाइ किया...

"तुमने कभी 61-62 किया है "

"व्हाट "

"61-62 ,हिन्दी मे समझाऊ क्या "

"मुझे कुछ काम आ गया है, बाय अरमान .."

"भाटा है घर मे..."

"व्हाई ?"

"बस ऐसे ही......"शैतानी हंसी हँसते हुए अरुण ने type किया

"Behave Yourself, Arman... I am a girl and  i am your super senior"

"कुछ काम आ गया है ,अब मैं भी  जा रहा हूँ..."इसी के साथ अरुण ने मोबाइल एक किनारे फेक दिया और हम दोनो अपना पेट पकड़ कर एक साथ  हंस पड़े....


उस रात सिगरेट पीने और फालतू की फालतुगिरी  करने के अलावा मैने कुछ नही किया, आधी रात को दूसरो के रूम के सामने जाकर ज़ोर से दरवाज़ा पीटता और फिर भाग जाता, रूम के अंदर सो रहे लड़के गालियाँ देते हुए उठते और फिर बाहर किसी को ना देखकर  और भी गालियाँ बकते....

उसके बाद कुछ दिनो तक कुछ भी खास नही हुआ, गौतम और ऐश हर दिन साथ मे ही कॉलेज आते और साथ मे ही  जाते , गौतम से मेरी नोक-झोक भी इतने दिनो मे नही हुई थी इसलिए माहौल अब ठंडा था, सिदार से एक दो बार बातचीत हुई थी जिससे मुझे मालूम चला था कि वरुण और उसके दोस्त बहुत जल्द ठीक हो जाएँगे और कॉलेज भी आने लगेंगे....


मुझे एक लड़की की तालश बचपन से थी , ऐसी लड़की जिसको देखकर मेरी आँखे उसकी आँखो से होती हुई सिर्फ़ आँखो पर ही टिकी रहे , दीपिका और विभा को जब भी देखता तो मेरी नजरें उनकी सिर्फ उनकी आँखों मे टिकने की बात तो बहुत दूर की थी बल्कि, उन्हें देखकर मेरी नजरें  उनकी आँखो से शुरू ही नही होती थी वो तो सीधे नीचे से शुरू होकर आख़िरी मे आँखो पर पहुचती थी लेकिन ऐश के केस मे ऐसा नही था , मैने अभी तक उसके सिर्फ़ भूरी आँखो और खूबसूरत चेहरे मे ही ढंग से निगाह डाली थी....


मैं सीधा साधा मिड्ल क्लास फॅमिली से बिलोंग  करता था, इसलिए मैं एक सीधी-साधी लड़की चाहता था जो मुझसे प्यार करे और जिससे मैं प्यार करूँ....प्लेबाय बनकर हर हफ्ते गर्लफ्रेंड चेंज करना मुझे पसंद नही था लेकिन ऐसी लड़किया मुझे बहुत मिली जो सिर्फ़ दूसरो को दिखाने के लिए ,दूसरो को जलाने के लिए मेरी गर्लफ्रेंड बनने को तैयार थी, लेकिन उन सबको मैने दरकिनार करते हुए हमेशा उस एक लड़की की तलाश मे रहा जो सीधे लेफ्ट साइड मे अपना असर दिखाए,...ऐश की भोली सूरत, उसका बात-बात पर झगड़ना और हर दम नाक पर गुस्सा लेकर चलना मुझे बहुत पसंद था, पसंद नही था तो सिर्फ़ एक चीज़ की वो गौतम की गर्लफ्रेंड थी....


दिमाग़ ने हज़ार बार मुझसे कहा कि ऐश और तेरा मिलना 99.99 % नामुमकिन है ,लेकिन फिर दिल के किसी कोने से आवाज़ आई कि 00.01% चान्स तो है, इसमे 1000 का मल्टिप्लाइ करके ऐश और खुद की स्टोरी के चान्सस 100 % कर ले.. Afterall, मैथमेटिक्स से था... तो मैने ये कैलकुलेशन भी कर लिया...


"तुझे कुछ समझ आ रहा है, इधर तो सब सर के उपर से जा रहा है... कल BME का टेस्ट भी है ."अरुण अपना बाल नोंचते हुए बोला...

"मुझे रैंचो समझ रक्खा है क्या...? जो बिना पढ़े टॉप मार जाउन्गा...? तेरी तरह, मुझे भी कुछ समझ नही आ रहा...."

"ये साला,  हरामी.... एक ही डेरिवेशन का दस अलग -अलग तरीका देकर मर गया... घंटा समझ एक से भी नही आया और अब खुद से हमें  पढ़ना पड़ रहा है..."

"ये साइंटिस्ट यदि आज ज़िंदा होते तो गोली मार देता इन सबको "बुक पर दोबारा नज़र गढ़ाते हुए मैं बोला"ये देख,इतना बड़ा फ़ॉर्मूला...ये तो साला पूरे 4 साल मे भी याद ना हो..."

वो रात हमने बुक्स के राइटर और अपना अलग-अलग सिद्धांत और फार्मूला  देकर मर गये महान लोगो को गालियाँ देकर बिताई, पहले से  आदत थी 4 बजे सुबह उठने की , उस दिन भी आँख सुबह 4 बजे खुली.... जबकि मैं 12 बजे ही  सोया था... आँखो मे जलन और सर भारी लग रहा था, मन कर रहा था कि फिर से लाइट बंद करू और चादर ओढ़ कर फिर से सो जाउ, लेकिन आज होने वाली टेस्ट  की टेंशन  से सर भारी होते हुए भी सर को हल्का करना पड़ा.... मैं 5-10 मिनट. तक ठंडे पानी की बाल्टी मे अपना सर डुबोये रक्खा और जब वापस अपने रूम की तरफ आने लगा तो मुझे वही शरारत सूझी जो रात को अक्सर मैं किया करता था....मैने ज़ोर से एक रूम का दरवाज़ा खटखटाया....


"कौन है बे..."एक मरी हुई आवाज़ मे अंदर से किसी ने मुझसे मेरा परिचय पुछा....

"पोलीस...दरवाज़ा खोलो जल्दी"अपनी आवाज़ कड़क करते हुए मैने कहा"हॉस्टल  मे खून हुआ है और तू सो रहा है... खोल दरवाजा अभी डंडा डालता हूँ तेरे पिछवाड़े मे..... साले, हरामी... निकल बाहर"

इतना बोलकर मैं वहाँ से तुरंत अपने रूम की तरफ भागा और जब अंदर घुस गया तो मुझे उस रूम मे रहने वालो की आवाज़ सुनाई दी.......

"ये साले कुछ कुत्तो  ने उपद्रव मचा रखा है कई  दिनो से... ना दिन मे सोने देते है, ना रात मे... ऐसी तैसी कर दी है जिंदगी की... शिकायत करनी पड़ेगी इनकी.... कैमरा भी मरवाने के लिए लगवाया है कॉलेज वालों ने.. साला काम ही नही करता "

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5 Comments

Kaushalya Rani

26-Nov-2021 06:34 PM

Nice

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Barsha🖤👑

26-Nov-2021 05:38 PM

अच्छा भाग

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Aliya khan

01-Sep-2021 12:14 PM

Bahut Khoobsurat

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